अहमदाबाद के राजपुरोहित समाज ने अपनी पूर्णिमा भजन संध्या का आयोजन पूर्ण श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ संपन्न किया।
गणेश वंदना से शुभारंभ
संध्या का शुभारंभ भगवान गणेश की वंदना से हुआ, जिसने आगे के पूरे कार्यक्रम के लिए भक्तिमय वातावरण तैयार कर दिया।
एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां
मंच पर एक के बाद एक भजन गायकों ने प्रस्तुति दी, और हर प्रस्तुति पिछली से अधिक भावपूर्ण रही। पूरा आयोजन स्थल भक्ति रस में डूब गया।
श्रद्धालु हुए भावविभोर
श्रद्धालु भजनों पर झूमते और साथ-साथ गाते नजर आए, और भक्ति में पूरी तरह तल्लीन हो गए।
पूर्णिमा भजन संध्या की परंपरा
प्रत्येक माह पूर्णिमा को भजन संध्या आयोजित करने की परंपरा अनेक समाजों में देखी जाती है। पूर्णिमा को हिंदू पंचांग में विशेष शुभ तिथि माना जाता है, और नियमित मासिक तिथि तय होने से समाजजनों के लिए कार्यक्रम में सम्मिलित होना सुविधाजनक हो जाता है। इससे यह आयोजन समाज का एक स्थायी मासिक मिलन भी बन जाता है, जहां लोग एक-दूसरे का हालचाल जान पाते हैं।
समाज के आयोजनों की भूमिका
जाति या क्षेत्र आधारित समाज संगठनों द्वारा कराए जाने वाले नियमित आयोजन प्रवासी परिवारों के लिए संपर्क का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इनसे नई पीढ़ी को समाज के लोगों से परिचय मिलता है और वैवाहिक व व्यावसायिक संबंध भी बनते हैं।


