राजपुरोहित समाज ने अहमदाबाद की नरोल-वटवा पट्टी में होली के अवसर पर स्नेह मिलन का आयोजन किया, जिसमें त्योहार के रंगों के साथ सामाजिक जुड़ाव भी घुला रहा।
खेतेश्वर महाराज के आशीर्वाद से
यह आयोजन खेतेश्वर महाराज के आशीर्वाद से संपन्न हुआ और समाज के भीतर एकता का प्रतीक बन गया।
प्रतिवर्ष की परंपरा
होली के आयोजन हर वर्ष अहमदाबाद के राजस्थानी परिवारों को एक साथ लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, और यह स्नेह मिलन उसी परंपरा की कड़ी है।
स्नेह मिलन क्या होता है
स्नेह मिलन समाज का वह सामूहिक आयोजन है जिसका उद्देश्य किसी अनुष्ठान से अधिक आपसी परिचय और मेलजोल होता है। इसमें परिवार एक-दूसरे से मिलते हैं, बच्चों का परिचय होता है और समाज के वरिष्ठजनों का सम्मान किया जाता है।
होली और सामाजिक समरसता
होली को परंपरागत रूप से भेदभाव मिटाने वाला त्योहार माना गया है। रंग लगने के बाद सब एक जैसे दिखते हैं — यही भाव इन सामूहिक आयोजनों की आत्मा है। प्रवासी समाजों के लिए यह अवसर अपनी सामूहिक पहचान को दोहराने का भी होता है।
नरोल-वटवा में राजपुरोहित परिवार
अहमदाबाद की नरोल-वटवा पट्टी में राजपुरोहित समाज के बड़ी संख्या में परिवार बसे हुए हैं। यही सघन उपस्थिति इस क्षेत्र में समाज के नियमित आयोजनों को संभव बनाती है, और यहां के आयोजनों में सहभागिता प्रायः बहुत अधिक रहती है।


