राजस्थान के राजलदेसर में भव्य गींदड़ होली का आयोजन किया गया, जो इस क्षेत्र की होली से जुड़ी सबसे प्रिय पारंपरिक रीतियों में से एक है।
गींदड़ की लय
गींदड़ परंपरा में लयबद्ध प्रश्न-उत्तर शैली का गायन और नृत्य होता है, जिसने पूरे समाज को एक साथ जोड़ दिया।
राजस्थानी गौरव का प्रदर्शन
यह आयोजन राजस्थानी गौरव और सांस्कृतिक विरासत का उत्साहपूर्ण प्रदर्शन बना।
गींदड़ नृत्य की विशेषता
गींदड़ मुख्यतः शेखावाटी क्षेत्र — सीकर, चूरू, झुंझुनूं — की होली परंपरा है। इसमें पुरुष हाथों में डंडे लेकर बड़े नगाड़े या चंग की थाप पर नृत्य करते हैं। रातभर चलने वाले इन आयोजनों में स्वांग यानी वेशभूषा बदलकर हास्य प्रस्तुतियां भी होती हैं।
मूल क्षेत्र से जुड़ाव
अहमदाबाद में बसे शेखावाटी क्षेत्र के परिवारों के लिए राजलदेसर जैसे कस्बों की होली उनकी स्मृतियों का हिस्सा है। यही कारण है कि प्रवासी समाज अपने आयोजनों में इन्हीं परंपराओं को दोहराने का प्रयास करता है।
रातभर चलने वाले आयोजन
गींदड़ जैसे आयोजन प्रायः रातभर चलते हैं और इनमें पूरे कस्बे की भागीदारी होती है। ये केवल नृत्य नहीं, बल्कि सामूहिक स्मृति और सामाजिक संबंधों को दोहराने का वार्षिक अवसर भी होते हैं।


