अहमदाबाद के नरोल स्थित शिवम पार्क सोसाइटी में “एक शाम शूरापुरा के नाम” शीर्षक से भव्य भजन संध्या का आयोजन किया गया, जो लोकदेवता शूरापुरा को समर्पित रही। आयोजन में श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति रही।
भक्ति और उत्सव का वातावरण
संध्या के भजन गायन ने सोसाइटी परिसर को आस्था और उत्सव के वातावरण से भर दिया।
लोकदेवताओं की भजन संध्या
यह आयोजन अहमदाबाद के राजस्थानी समाज में लोकदेवताओं को समर्पित भजन संध्याओं की निरंतर लोकप्रियता को दर्शाता है।
शूरापुरा — वीरों की उपासना
राजस्थान और गुजरात की लोक परंपरा में शूरापुरा उन वीर पुरुषों को कहा जाता है जिन्होंने समाज, गौ या धर्म की रक्षा में प्राण दिए, और जिन्हें बाद में देवता के रूप में पूजा जाने लगा। लगभग हर गांव और कुल के अपने शूरापुरा होते हैं, जिनके थान या चबूतरे पर पूजा होती है।
लोक आस्था की निरंतरता
बड़े देवी-देवताओं के साथ-साथ इन लोकदेवताओं की उपासना का बना रहना यह दर्शाता है कि प्रवासी समाज अपनी स्थानीय और पारिवारिक आस्थाओं को भी उतनी ही गंभीरता से सहेजता है।
थान और चबूतरे
लोकदेवताओं की पूजा प्रायः मंदिर के बजाय खुले थान या चबूतरे पर होती है। शहरों में बसने के बाद परिवार इन स्थानों की स्मृति को भजन संध्या जैसे आयोजनों के माध्यम से जीवित रखते हैं।


