अहमदाबाद का नरोल क्षेत्र रंगारंग होली फागण महोत्सव की तैयारियों में जुटा है। आयोजकों के अनुसार यह आयोजन रंगों के त्योहार को राजस्थानी-गुजराती समाज की साझा भावना के साथ मनाएगा।
मोहल्ले की उत्सव परंपरा
यह आयोजन होली के आसपास होने वाले क्षेत्रीय सामूहिक कार्यक्रमों की उसी परंपरा को आगे बढ़ाता है, जो नरोल में वर्षों से चली आ रही है।
मुख्य पर्व से पहले का उत्सव
मुख्य होली से पहले होने वाले इन आयोजनों में संगीत, रंग और सामूहिक उत्सव के माध्यम से निवासी एक साथ आते हैं।
फागण मास का महत्व
फागण या फाल्गुन हिंदू पंचांग का अंतिम मास है, जो वसंत ऋतु और होली का समय होता है। इस पूरे मास में फाग गीत गाए जाते हैं और गांवों में प्रतिदिन संध्या को चंग-डफ की बैठकें होती हैं। इसीलिए होली केवल एक दिन का नहीं, बल्कि लगभग पूरे मास चलने वाला उत्सव माना जाता है।
दो संस्कृतियों का संगम
नरोल जैसे क्षेत्रों में राजस्थानी और गुजराती परिवार साथ रहते हैं, और उनके त्योहार भी परस्पर घुल-मिल गए हैं।
तैयारियों में सहभागिता
ऐसे आयोजनों की तैयारी में मोहल्ले के युवा सप्ताहों तक जुटे रहते हैं — चंदा संग्रह, मंच निर्माण, ध्वनि व्यवस्था और आमंत्रण। यह तैयारी स्वयं में एक सामाजिक प्रक्रिया बन जाती है।


