❧❧  राजस्थान की संस्कृति, हमारी पहचान  ❧❧

नरोल में भंवरसिंह राजपुरोहित परिवार का भव्य गृह प्रवेश, सुंदरकांड पाठ और हवन

8 September 2026
नरोल में भंवरसिंह राजपुरोहित परिवार का भव्य गृह प्रवेश, सुंदरकांड पाठ और हवन

अहमदाबाद के नरोल क्षेत्र में भंवरसिंह राजपुरोहित परिवार ने अपने नवनिर्मित घर के गृह प्रवेश को पूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया।

संगीतमय सुंदरकांड से शुरुआत

कार्यक्रम की शुरुआत श्री सुंदरकांड सत्संग मंडल (इसनपुर) द्वारा प्रस्तुत संगीतमय सुंदरकांड पाठ से हुई। पूरे आयोजन स्थल पर जय श्री राम के जयकारे गूंजते रहे।

अगली सुबह वैदिक हवन

अगले दिन प्रातःकाल वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन संपन्न कराया गया, जिससे नए घर में पवित्र ऊर्जा का संचार हुआ। इसके पश्चात प्रीतिभोज का आयोजन हुआ, जिसमें अतिथियों ने प्रसाद ग्रहण कर परिवार को आशीर्वाद दिया।

समाजजनों की उपस्थिति

इस अवसर पर मार्क एक्सप्रेस प्रा. लि. के निदेशक रामसिंहजी सहित समाज के अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे और परिवार को शुभकामनाएं दीं।

दो दिवसीय आयोजन की परंपरा

गृह प्रवेश को दो दिनों में विभाजित करने की परंपरा — पहली संध्या सुंदरकांड या भजन और अगली सुबह हवन — अहमदाबाद के राजपुरोहित समाज में सामान्य है। इससे एक ओर समाज के लोग सांध्य आयोजन में सहजता से सम्मिलित हो पाते हैं, वहीं दूसरी ओर प्रातःकालीन हवन विधिवत और शांत वातावरण में संपन्न होता है।

राजपुरोहित समाज की सक्रियता

अहमदाबाद में राजपुरोहित समाज के परिवार बड़ी संख्या में बसे हुए हैं और समाज के आयोजनों में उनकी सहभागिता उल्लेखनीय रहती है। व्यक्तिगत आयोजनों में भी समाज के लोगों की उपस्थिति इस बात का संकेत है कि यहां सामाजिक ताना-बाना कितना मजबूत है।

यह लेख साझा करें

✦—— और लेख ——✦

राजस्थान की और कहानियां

Men dancing Gair in white with colour in the air at a Holi gathering

राजस्थानी होली — गेर, घूमर, गींदड़, चंग और अहमदाबाद के फागुन महोत्सव

राजस्थान की होली परंपरा — गेर, घूमर और गींदड़ नृत्य, चंग-डफ की थाप, फाग गीत और फागुन महोत्सव। साथ ही अहमदाबाद के राजस्थानी समाज में होने वाले होली आयोजनों और सुरक्षित होली की जानकारी।

Singers and musicians at a bhajan sandhya

भजन संध्या — प्रकार, वाद्ययंत्र, आयोजन विधि और अहमदाबाद की परंपरा

भजन संध्या क्या है, इसके प्रकार — श्याम संकीर्तन, माता की चौकी, पूर्णिमा भजन संध्या और प्रभात फेरी। वाद्ययंत्रों की भूमिका, आयोजन कैसे करें और अहमदाबाद के राजस्थानी समाज में इसकी परंपरा।

A Sundarkand Path in progress at a temple

सुंदरकांड पाठ — महत्व, विधि, लाभ और अहमदाबाद की परंपरा

सुंदरकांड पाठ क्या है, इसका महत्व, पाठ की विधि, लाभ और संगीतमय सुंदरकांड की परंपरा। साथ ही अहमदाबाद के राजस्थानी समाज में होने वाले सुंदरकांड आयोजनों की जानकारी।